क्रमाॅंक:- 608, सोनाखान, जिला-बलौदा बाजार,छत्तीसगढ़ से कवि परमानंद निषाद"प्रिय" की विशेष रचना- स्वदेशी अपनाओ, देश बचाओ
स्वदेशी अपनाओ, देश बचाओ
तजहु विदेशी वस्तु सब, गढ़हु राष्ट्र बलवान।
यह संदेश न रुक सके, पंद्रह जन तक जान।।
कोका मैगी लोरियल, पेप्सी लेविस ब्रैंड।
तजो विदेशी जाल यह, सजें देश के प्रैंड।।
कोलगेट बिन क्या यहाँ, सोते पिय सँग वाम।
लवली बिन क्या रूप का, रुकता जग में नाम।।
बिन स्वदेशी साधन यहाँ, श्रृंगार न होय।
गोरी सुंदर नारि का, रूप न मद्धम होय।।
बिन स्कर्ट शिक्षा मिले, बिन डिस्को संगीत।
ग्रुप-ग्रुप में भेजिये, यह स्वदेशी प्रीत।।
बिन अंग्रेजी क्या यहाँ, उपजे नहीं सुजान?
देशी वस्तु अपनाइये, संकट में हो प्रान।।
नब्बे दिन वरजें विदेशी, भारत बने महान।
चले आंदोलन देश में, जागे सब इंसान।।
पल भर में यह सीख तुम, भेजो सकल जहान।
हास्य छोड़ संदेश यह, पढ़े वीर संतान।।
परमानंद निषाद 'प्रिय'
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