क्रमाॅंक:- 610, सोनाखान, जिला-बलौदा बाजार,छत्तीसगढ़ से कवि परमानंद निषाद"प्रिय" की विशेष रचना- माँ-बेटी का स्नेह

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                    माँ-बेटी का स्नेह

मातु खड़ी संग लाडली, ऋचा नाम है श्यामा।
दो सुंदर मूरत सजी, जैसे लक्ष्मी-रामा।।

पीछे सुंदर दृश्य है, बगीया का द्वार।
खडे़ हुए मात-सुता, झलकें प्रेम अपार।।

हरा साड़ी में सजी, ममतामयी माँ आज।
ऋचा श्वेत पोशाक में, सादगी का सरताज।।

दोनों के चेहरे खिले, निर्मल पावन हास।
अधरों पर मुस्कान है, मन में दृढ़ विश्वास।।

माथे सोहे तिलक शुभ, चंदन केसर सार।
भक्ति भाव मन में जगा, दूर हुआ अंधकार।।

माँ ने दीन्ही लाडली, सुंदर सीख-संस्कार।
ऋचा बढ़ाए मान को, महके सब संसार।।

माँ बेटी का यह मिलन, जैसे गंगा-धार।
सच्ची सखी माँ बन गई, जीवन का आधार।।

भोले शंकर देख रहे, दे आशीष अनंत।
सुखी रहे यह परिवार, आए सदा वसंत।।

रिश्ता माँ और बेटी का, जग में सबसे खास।
साये जैसी साथ रहे, टूटे कभी न आस।।

युग-युग जोड़ी यह रहे, खुशियों से भरपूर।
ऋचा और माता का स्नेह, कभी न होवे दूर।।

                        परमानंद निषाद 'प्रिय'

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