क्रमाॅंक:- 613, सोनाखान, जिला-बलौदा बाजार,छत्तीसगढ़ से कवि परमानंद निषाद"प्रिय" की विशेष रचना- राष्ट्रध्वज तिरंगा
राष्ट्रध्वज तिरंगा
केसरिया श्वेत हरा, ध्वज यह अति अभिराम।
चक्र सुदर्शन बीच में, करता देश प्रणाम।।1।।
नील गगन की गोद में,लहराता दिन रैन।
भारत की यह शान है,देता सबको चैन।।2।।
नीचे सुंदर बाग है,खिले फूल गुलजार।
सजी हुई हैं क्यारियाँ,मनमोहक संसार।।3।।
नीला चक्र सिखा रहा,गति का शुभ संदेश।
सतत बढ़ें आगे सभी,सुखमय होवे देश।।4।।
नभ में पाखी उड़ रहे, छूने को आकाश।
ध्वज को देख प्रसन्न हैं, फैला रहे प्रकाश।।5।।
नभ में यह सुंदर खड़ा, भारत की पहचान।
शीश झुकाए देश सब, देख अमर यह मान।।6।।
चक्र बनाया फूल से, धरती पर अभिराम।
केसरिया और श्वेत से, महक रहा यह धाम।।7।।
श्वेत रंग संदेश दे, अमन चैन का मीत।
सारे जग से हम करें, उत्तम पावन प्रीत।।8।।
हरा रंग खुशहाल है, खेतों में हरियाल।
देख इसे ही खिल रही, उपवन की हर डाल।।9।।
उन्नत मस्तक राष्ट्र का, ऊँचा रहे सदैव।
सेवा में इसके रहें, मिटे आपदा दैव।।10।।
परमानंद निषाद 'प्रिय'
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