क्रमाॅंक:- 614, सोनाखान, जिला-बलौदा बाजार,छत्तीसगढ़ से कवि परमानंद निषाद"प्रिय" की विशेष रचना- मातृ छाया और सुत-सुता
मातृ छाया और सुत-सुता
परमानंद सुत योग्य है, सुंदर बिटिया मीत।
ऋचा सुता है लाडली, गाए सुख के गीत।।
माता खड़ी सानंद है,पाकर दोनों प्यार।
ऋचा और परमानंद, जीवन के आधार।।
सुत प्यारा परमानंद, सुता ऋचा सुखधाम।
संस्कार माता दिए, पूरण कीन्हे काम।।
नीली आभा शर्ट में, परमानंद सुजान।
हरे सूट में है ऋचा, मूरत चतुर सुजान।।
पहने साड़ी पीत माँ, दे सुत-सुता को ज्ञान।
ऋचा बढ़ी आगे सदा, परमानंद निधान।।
फूल खिले हैं राह में, महके सुख की बेल।
परमानंद अरु ऋचा,सुंदर अद्भुत मेल।।
परमानंद सपूत है,ऋचा गुणी सुकुमार।
जननी गौरव पा रही,पाकर सुख संसार।।
भ्राता-भगिनी स्नेह यह,जैसे गंगा धार।
परमानंद औ ऋचा से, महके गृह-परिवार।।
शीश नवाएँ मात को, पाएँ सुख आशीष।
ऋचा औ' परमानंद को, पूजें नित जगदीश।।
परमानंद बढ़ता रहे,ऋचा छुए आकाश।
माता के आशीष से, जीवन में प्रकाश।।
परमानंद निषाद 'प्रिय'
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