क्रमाॅंक:- 624,सोनाखान, जिला-बलौदा बाजार,छत्तीसगढ़ से कवि परमानंद निषाद"प्रिय" की विशेष रचना- सुशासन तिहार
सुशासन तिहार
नरपति मोदी साय मिल, करहिं जनमना काज।
सुघर सुशासन आ गया, खुश है सकल समाज।।
गाँव-गाँव और द्वार पर, पहुँची आज सरकार।
दुख-दरिद्र सब दूर हो, सुख का खुला दुआर।।
लगे शिविर हर ग्राम में, मिटे कलेश कलेश।
जन-जन की पीड़ा हरी, बदला है परिवेश।।
वार्ड-वार्ड चौपाल पर, सुनत समस्या बात।
मददगार सरकार है, सुख की आई रात।।
जिला स्तर के जो बचे, रुके पड़े थे काम।
पल भर में सब हो रहे, मिला न्याय को धाम।।
कागज-पत्तर या ज़मीं, उलझे जो मामले।
तुरंत निपटारा हो रहा, सुशासन के तले।।
बने प्रमाण-पत्र अब, भटकना नहिं कोय।
सहज सरल सब काम हो, जनता खुशियाँ बोय।।
मई एक से जून दस, चला न्याय का पर्व।
गढ़बो छत्तीसगढ़ नया, सबको इस पर गर्व।।
नारी-नर सब मिल हँसे, आया मंगल दौर।
तिहार सुशासन का मना, खुशहाली चहुँ ओर।।
द्वार खड़ी सरकार है, माँग रहा नहिं कोय।
रामराज की चेतना, सबके मन में होय।।
परमानंद निषाद 'प्रिय'
0 Response to "क्रमाॅंक:- 624,सोनाखान, जिला-बलौदा बाजार,छत्तीसगढ़ से कवि परमानंद निषाद"प्रिय" की विशेष रचना- सुशासन तिहार "
एक टिप्पणी भेजें