क्रमाॅंक:- 625,सोनाखान, जिला-बलौदा बाजार,छत्तीसगढ़ से कवि परमानंद निषाद"प्रिय" की विशेष रचना- आरसीबी की ऐतिहासिक विजय
आरसीबी की ऐतिहासिक विजय
मन में था विश्वास दृढ़, मिटा दिया सब शूल।
आरसीबी ने खेला, अद्भुत विजय दुकूल।।
वर्षों का सूखा मिटा, चमकी किस्मत आज।
खिताब जीता शान से, सिर पर सोहे ताज।।
चमक उठा चेहरा यहाँ, वीर विराट निहार।
ट्रॉफी हाथों में लिए, झूम रहा संसार।।
हम ग्यारह जाँबाज हैं, सब पर भारी आज।
रच डाला इतिहास है, गरजे वीर समाज।।
फैन हुए गदगद सभी, भूल गए सब पीर।
लाल रंग की जर्सी में, चमकी नई तकदीर।।
गूँज उठा मैदान अब, आरसीबी के नाम।
मेहनत रंग लाई यहाँ, सफल हुए सब काम।।
बरस रहा है स्वर्ण अब, खुशियों की बौछार।
गले मिले सब वीरवर, उमड़ा पावन प्यार।।
'हम ग्यारह हमारे दो', गूँज रहा यह बोल।
मेहनत से पाई विजय, जिसका मोल न तोल।।
धैर्य रखा जिसने यहाँ, पाया उसने मान।
बेंगलुरु की टीम ने, रख ली अपनी शान।।
जीत गए बाजी कठिन, मिटा पुराना रोष।
ट्रॉफी पाकर आ गया, वीरों में नव जोश।।
परमानंद निषाद 'प्रिय'
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