क्रमाॅंक:- 641,सोनाखान, जिला-बलौदा बाजार,छत्तीसगढ़ से कवि परमानंद निषाद"प्रिय" की विशेष रचना- माँ सरस्वती वंदना
माँ सरस्वती वंदना
श्वेत वसन धारिणि प्रिये, हंस वाहिनी मात।
विद्या बुद्धि विवेक दो, मेटो मन का तात।।
वीणा पाणि हाथ में, मधुर बजाओ तान।
अज्ञानता का नाश हो, फैले जग में ज्ञान।।
कमलासन बैठी प्रिये, मुख पर अनुपम नूर।
शरण तुम्हारी जो रहे, दुःख हो उसका दूर।।
हाथ एक पुस्तक सजे, वेद ज्ञान का सार।
मस्तक सुंदर मुकुट है, महिमा अपरम्पार।।
माला जपते हाथ से, ध्यान लगा मन लाय।
शारदे माँ की कृपा से, बिगड़े काज बनाय।।
हंस मनोहर पास में, नीर क्षीर का ज्ञान।
हम बालक नादान हैं, दे दो माँ कल्यान।।
चरण कमल में आपके, शीश झुकाते आज।
वाणी में मधुरता भरो, सिद्ध करो सब काज।।
ज्ञान दीप नीचे जले, महके मोर का पांख।
सत्य मार्ग हमको मिले, खुले ज्ञान की आँख।।
सकल जगत पूजत तुम्हें, ऋषि मुनि और सुजान।
अंधकार सब दूर कर, दो प्रकाश का दान।।
शारदे मात दया करो, तुम ही आदि सनात।
भक्ति भाव मन में रहे, सुमिरूँ दिन और रात।।
परमानंद निषाद 'प्रिय'
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