क्रमाॅंक:- 642,सोनाखान, जिला-बलौदा बाजार,छत्तीसगढ़ से कवि परमानंद निषाद"प्रिय" की विशेष रचना- पंचामृत
पंचामृत
दूध दही घृत शहद संग, मिश्री मिली अनूप।
पंचामृत पावन बना, प्रभु का सुंदर रूप।।
धवल धार सा दूध यह, मन पावन कर जाय।
कण-कण में श्रद्धा जगे, प्रभु चरणों चित लाय।।
दही जमाए दूध से, धीरज का संदेश।
जीवन में सुस्थिर रहें, मिटे सकल कलेश।।
घृत की पावन सुघड़ता, मिटाए सब अंधियार।
स्नेह बढ़े संसार में, फैले दिव्य प्रकाश।।
मिश्री सी रस घोलती, मीठी कोमल बोल।
कटुता जग की दूर कर, प्रेम सुधा रस घोल।।
मधु सा जीवन में रहे, उत्तम स्वास्थ्य अनूप।
मधुर भावना से भजें, ईश्वर का हर रूप।।
पंच तत्व के मेल से, पूजा पूर्ण सोहाय।
ठाकुर जी के भोग में, श्रद्धा भाव समाय।।
बाहर की शुद्धि करे, भीतर का अज्ञान।
पंचामृत रसपान से, जागे आत्म ज्ञान।।
प्रभु चरणों का नीर यह, पंचामृत सुख धाम।
भव बाधा सब दूर हो, जपो निरंतर नाम।।
श्रद्धा के इस थाल में, अर्पण बारंबार।
स्वीकारो प्रभु भोग यह, कीजे बेड़ा पार।।
परमानंद निषाद 'प्रिय'
0 Response to "क्रमाॅंक:- 642,सोनाखान, जिला-बलौदा बाजार,छत्तीसगढ़ से कवि परमानंद निषाद"प्रिय" की विशेष रचना- पंचामृत"
एक टिप्पणी भेजें