क्रमाॅंक:- 648,सोनाखान, जिला-बलौदा बाजार,छत्तीसगढ़ से कवि परमानंद निषाद"प्रिय" की विशेष रचना- सुख-दुख: जीवन के दो पहलू
सुख-दुख: जीवन के दो पहलू
सिक्के के दो रूप हैं, सुख और दुख महराज।
मन की जैसी भावना, वैसा दिखे समाज।।
सुख की चाहत सब करें, दुख से भागें दूर।
बिन पतझड़ भाए नहीं, मधुमास का सिंदूर।।
दुख ही पग भू पर रखे, देता धैर्य अपार।
संघर्षों की आग में, तपकर बने कटार।।
केवल सुख जो मिल रहा, जीवन होता नीरस।
दुख की घड़ियाँ घोलतीं, सुख का असली रस।।
परिपक्वता दे हमें, दुख ही नया प्रकाश।
ऊर्जा भर देता वही, मिटा हृदय का त्रास।।
समता रख दोनों तरफ, बढ़ता चल तू मीत।
हँसकर स्वीकारे जिन्हें, वही जगत में जीत।।
परमानंद निषाद 'प्रिय'
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