क्रमाॅंक:- 661,सोनाखान, जिला-बलौदा बाजार,छत्तीसगढ़ से कवि परमानंद निषाद"प्रिय" की विशेष रचना- सादगी की मूरत: ऋचा बहन
सादगी की मूरत: ऋचा बहन
सादापन मन को छुए, सहज रूप का रंग।
मुख मंडल पर दिख रही, गरिमा शील उमंग।।
सौम्य रूप ऋचा बहन, सादगी की पहचान।
मंद-मंद मुस्कान से, बढ़ता है सम्मान।।
सुंदर प्रिंटेड कुर्तिया, सोहे तन के पास।
गले लाल डोरी सजी, गरिमा का अहसास।।
छोटे झुमके कान में, चमक रहे अभिराम।
सादा जीवन उच्च मन, ऋचा बहन का नाम।।
केश सँवारे प्रेम से, बंधी पीठ के छोर।
शांत चित्त मुद्रा खड़ी, खींचे सबका ओर।।
माथे बिंदिया की चमक, नयनों में विश्वास।
सादापन की मूरतें, देतीं सुख का वास।।
पीछे जन का भीड़ है, खिड़की-छज्जे लोग।
उत्सव का माहौल है, सुंदर पावन योग।।
दीवारों पर धूप-छाँव, सुंदर सा परिवेश।
ऋचा बहन की सादगी, देती शुभ संदेश।।
सदा रहे आनंद यह, मुख पर यह मुस्कान।
जीवन पथ पर आप को, मिले सदा सम्मान।।
सुख-समृद्धि बढ़ती रहे, पूर्ण हों सब काम।
परमेश्वर की कृपा से, गूंजे जग में नाम।।
परमानंद निषाद 'प्रिय'
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