क्रमाॅंक:- 662,सोनाखान, जिला-बलौदा बाजार,छत्तीसगढ़ से कवि परमानंद निषाद"प्रिय" की विशेष रचना- कुंती माँ के तीन रत्न
कुंती माँ के तीन रत्न
शीतल छाया जैसी माता, नाम कुंती देवी प्यारा।
जिनके आँगन में चमकता, खुशियों का हर एक सितारा।।
बड़े पुत्र हैं परमानंद, जो घर की मुख्य धरोहर हैं।
गंभीर, धीर और सीधे-साधे, माँ के सच्चे संबल हैं।।
मंझले बेटे ओंकार यहाँ, जो कंधा बन साथ निभाते हैं।
अपनी मीठी बातों से, माँ का हर कष्ट मिटाते हैं।।
सबकी लाड़ली छोटी ऋचा, घर की चंचल उजियारी है।
पावन ममता की मूरत की, वह सबसे प्यारी दुलारी है।।
तीनों रत्न अमूल्य मिले, कुंती माँ के आँगन को।
इन बच्चों के आदर से, गौरव मिलता इस जीवन को।।
सींच रही हैं संस्कार माँ, सदा झुकाकर अपना शीश।
जुग-जुग जीए अपना परिवार, ईश्वर का है यह आशीष।।
परमानंद निषाद 'प्रिय'
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