क्रमाॅंक:- 663,सोनाखान, जिला-बलौदा बाजार,छत्तीसगढ़ से कवि परमानंद निषाद"प्रिय" की विशेष रचना- जगन्नाथ रथयात्रा
जगन्नाथ रथयात्रा
सुंदर रथयात्रा सजी, देखो रथ त्योहार।
शुक्ल पक्ष आषाढ़ में, सजा हुआ बाजार।।1।।
थामो मेरे हाथ को, भगवान जगन्नाथ।
खो न जाऊँ मैं भीड़ में, ले चल अपने साथ।।2।।
सुंदर पावन धाम में, रहते प्रभु जगन्नाथ।
भाई बहना साथ में, रथ पर आते नाथ।।3।।
भाई बलभद्र विराजते, बहना सुभद्रा संग।
सुंदर उनके रूप हैं, भरते जीवन रंग।।4।।
सुंदर सुंदर रूप में, खड़े हुए रथ तीन।
चकित रहे सब देखकर, रथयात्रा का दृश्य।।5।।
सोलह चक्कों पर सजे, बैठे हैं श्रीनाथ।
अपने भक्तों को सदा, प्रभुवर करते सनाथ।।6।।
पीछे रथ चलता हुआ, चौदह चक्के साथ।
जिस पर हैं बलभद्र जी, भक्त नवाते माथ।।7।।
भाइयों के मध्य में, बहना चलती जाय।
बारह चक्के से सजा, सुंदर रथ अति भाय।।8।।
आते देश-विदेश से, लोग पुरी के धाम।
दर्शन कर जगन्नाथ के, सफल करें सब काम।।9।।
प्रिय निषाद तू साथ में, लेकर चल परिवार।
भीड़ लगी है पुरी में, प्रभुवर देंगें प्यार।।10।।
परमानंद निषाद 'प्रिय'
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