क्रमाॅंक:- 695,सोनाखान, जिला-बलौदा बाजार,छत्तीसगढ़ से कवि परमानंद निषाद"प्रिय" की विशेष रचना- ऋचा: सौंदर्य की पावन मूरत
ऋचा: सौंदर्य की पावन मूरत
रूप अनूपम आपका, मन को लेता जीत।
मुख पर सुंदर सादगी, जैसे पावन गीत।।
मंद हँसी मुख पर सजे, बिखरे अचल सुवास।
लोचन में पावन दिखे, जैसे एक प्रकाश।।
पहने सुंदर वस्त्र जो, धानी रंग समान।
लगती धरती रूप सी, हर लेती अभिमान।।
ऋचा बहन की सादगी, गहना सुंदर मौन।
इस पावन से चित्र का, समता कर दे कौन।।
नयन झुके शर्मा रहे, मन में कोमल भाव।
शांत चित्त मुद्रा लिए, तनिक न कोई चाव।।
नभ मंडल सी आभा है, रूप झलकता खास।
लगती साक्षात ही, सुख का कोमल पास।।
झुमके कानो में सजे, कंगन हाथ अनूप।
बिंदिया माथे पर खिली, निखरा पावन रूप।।
लहरें काले केश की, कंधों पर लहराय।
जैसे घन सावन तनिक, अंबर पर घिर आय।।
शीतल पावन रूप यह, देता मन को चैन।
निर्मल मूरत देखकर, तृप्त हुए दो नैन।।
उतरी अंबर से यहाँ, अप्सरा सी आज।
सदा सुरक्षित ही रहे, कुल की निर्मल लाज।।
परमानंद निषाद 'प्रिय'
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