क्रमाॅंक:- 696,सोनाखान, जिला-बलौदा बाजार,छत्तीसगढ़ से कवि परमानंद निषाद"प्रिय" की विशेष दोहा छंद रचना- सिया-राम वंदन
सिया-राम वंदन
(दोहा छंद)
छवि अनुपम श्री राम की, बैठी मन में आय।
सीता माता संग में, सब दुख देय मिटाय।।
नील गगन से श्याम प्रभु, सोहे धनुष प्रवीन।
कृपा दृष्टि की धार से, हरते संकट दीन।।
मस्तक ऊपर मुकुट है, कुंडल कान सुहाय।
मंद मंद मुस्कान से, मन का मोह बढ़ाय।।
जनक दुलारी पास में, रूप शील की खान।
पति सेवा में लीन है, जग की प्राण समान।।
पीतांबर सोहे प्रभु, पटुका लाल ललाम।
अंग अंग सुंदर सजे, पावन सुंदर धाम।।
चरण कमल की धूलि को, वंदन बारंबार।
भव सागर से तारती, नैया कर दे पार।।
हाथ उठाए दे रहे, निर्भय का वरदान।
शरण पड़े जो आ गया, पाया पद कल्यान।।
कंचन थाली आरती, जो भी जन मिल गाय।
परम धाम वो पाइये,जनम सफल हो जाय।।
सिया राम की जोड़ी को, सुमिरन कर दिन रैन।
हृदय सदा आनंद हो, मिल जाए सच्चा चैन।।
'परम' विनीत पुकारता, सुनिए प्रभु रघुवीर।
भक्ति दान मोहे दीजिए,हरिए मन का पीर।।
परमानंद निषाद 'प्रिय'
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