क्रमाॅंक:- 697,सोनाखान, जिला-बलौदा बाजार,छत्तीसगढ़ से कवि परमानंद निषाद"प्रिय" की विशेष दोहा छंद रचना- शहीद की वीरांगना
शहीद की वीरांगना
(दोहा छंद)
भारत माता की कसम, खाकर वीर सुजान।
देकर अपना खून वह, रख गया देश की शान।।
महलों की चाहत तजी, पहना सादा भेष।
माथे का सिंदूर तज,याद किया बस देश।।
आँखों में आँसू थमे, दिल में पावन आग।
धर्म वीरता धारती,देकर सब अनुराग।।
रातों को सोती नहीं, याद करे वह प्यार।
गर्वित उसका है हृदय,वीर हुआ बलिहार।।
बिखरे मंगलसूत्र है,है उदास मुख आज।
पर चेहरे की दीप्ति में, देशभक्ति का राज।।
लोरी गाकर सुत कहे, पिता गए जो दूर।
दुश्मन मजा चखा रहे,चमके जैसे नूर।।
सूनी अब सिंदूर है, विरह वेदना आज।
करें विदाई अश्रु भर, है शहीद पर नाज।।
फक्र करे पूरा वतन, नारी तेरा रूप।
धैर्य देख तुम पर सखे, सहमी तीखी धूप।।
बलिदानों की कथा, होता जय जयकार।
अमर रहे इतिहास में, बनते जो पटवार.।।
जीवन सफल है किये, ओढ़ तिरंगा शान।
धरती माँ के लाल की, सदा करें सम्मान।।
परमानंद निषाद 'प्रिय'
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