क्रमाॅंक:- 698,सोनाखान, जिला-बलौदा बाजार,छत्तीसगढ़ से कवि परमानंद निषाद"प्रिय" की विशेष दोहा छंद रचना- श्री गणेश वंदना
श्री गणेश वंदना
(दोहा छंद)
शीश मुकुट सोहे सदा, गणपति रूप अनूप।
आदि देव तुम हो प्रभु, ज्ञान-कला के भूप।।
चार भुजा धारे प्रभु, मोदक हाथ सुहाय।
विघ्न-बाधा हरते प्रभु, संकट दूर भगाय।।
फूल-माल सुंदर गले, पीताम्बर तन गात।
रूप मनोहर आपका, हर्षित होते मात।।
मूषक वाहन आपका, महिमा अपरम्पार।
विघ्न-विनाशक आप हो, जग के पालनहार।।
माथे तिलक सुहावना,करुणा के हो खान।
शरण पड़े जो आपकी, पावे सुख-सम्मान।।
भक्त खड़े सब द्वार पर, करते नित जयकार।
लड्डू पेड़ा थाल ले, करते प्रभु सत्कार।।
रिद्धि-सिद्धि के नाथ तुम, मंगल के दातार।
सिद्ध काज करते सदा,आये तेरे द्वार।।
ज्ञान बुद्धि दाता तुम्हीं, हरते सब संताप।
नाम जपे जो आपका, मिटते उसके पाप।।
रूप मनोहर देख मन, जाग उठे अनुराग।
जीवन-नैया पार करो, हर लो मन के दाग।।
हाथ जोड़ विनती करूँ, सुनिए आदि गणेश।
‘परमानंद’ सुख दीजिए,कटे क्लेश परमेश।।।
परमानंद निषाद ‘प्रिय’
0 Response to "क्रमाॅंक:- 698,सोनाखान, जिला-बलौदा बाजार,छत्तीसगढ़ से कवि परमानंद निषाद"प्रिय" की विशेष दोहा छंद रचना- श्री गणेश वंदना"
एक टिप्पणी भेजें