क्रमाॅंक:- 700,सोनाखान, जिला-बलौदा बाजार,छत्तीसगढ़ से कवि परमानंद निषाद"प्रिय" की विशेष रचना - अभिषेक की आतिशी बल्लेबाजी
अभिषेक की आतिशी बल्लेबाजी
अभिषेक ने आज तो, ढाया ऐसा कहर।
तीस गेंद में सौ किए, गूँज उठा हर शहर।।
बल्ला घूमा जोर से, बरसे छक्के आज।
क्रिकेट के मैदान पर, छाए वीर सरताज।।
देख बैटिंग वीर की, झूम उठा संसार।
गेंद गई आकाश में, बाउंड्री के पार।।
अद्भुत दिखाया खेल है, अद्भुत वीर जवान।
शतक जड़ा ऐसा समाँ, चकित हुए बलवान।।
गेंदबाज सब थक गए, मिली न कोई राह।
अभिषेक की मार से,निकली सबके आह।।
रंग जमाया खेल में, अद्भुत किया कमाल।
तीस गेंद का यह शतक, बना आज बेमिसाल।।
नभ चूमे हर शॉट ही, बरसे रन घनघोर।
दर्शक सब चिल्ला उठे, गूँजा चारों ओर।।
"परमानंद" प्रमोद है, देख युवा का खेल।
मेहनत और लगन का, दिखा अनूठा मेल।।
भारत की उम्मीद है, यह उज्ज्वल सितार।
हर संकट को पार कर, जीत रहा संसार।।
अभिषेक की जीत पर, हुआ देश निहाल।
क्रिकेट के इतिहास में, लिख डाला कमाल।।
परमानंद निषाद 'प्रिय'
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