क्रमाॅंक:- 716,सोनाखान, जिला-बलौदा बाजार,छत्तीसगढ़ से कवि परमानंद निषाद"प्रिय" की विशेष दोहा छंद रचना- माँ कात्यायनी महिमा
माँ कात्यायनी महिमा
(दोहा छंद)
सिंह पीठ पर सोहती, दिव्अय रूप अभिराम।
कात्यायनी मैया नमो, पूरन कीजै काम।।
चार भुजा धारे विमल, खड्ग-पद्म वर हाथ।
अभयदान देती सदा, नवें सभी के माथ।।
मस्तक ऊपर मुकुट छवि, मंद-मंद मुस्कान।
दुष्ट-दलन माता करें, देव करें गुणगान।।
कात्यायन ऋषि के यहाँ, प्रगटी आदि भवानि।
महिषासुर को मार के, जग में पूज्य करानि।।
छठवाँ रूप अनूप है, नवदुर्गा के माहिं।
जो ध्यावे श्रद्धा सहित, दुःख कछु रहै नाहिं।।
पिंगल वर्ण सुहावना, अम्बर दिव्य सुवास।
भक्त जनों के हृदय में, कीजै सदा निवास।।
कृपा करो जगदम्बिका,हम हैं बालक दास।
चरण-शरण में राखिए, पूरौ मन की आस।।
संकट सारे काटती, मैया सिंह सवार।
तेरी महिमा अमित है, गावे सब संसार॥
ऋद्धि-सिद्धि नव निधि दियो,सुमिरत सुख फल पाय।
कात्यायनी माँ की शरण, सकल विघ्न मिट जाय।।
परमानंद सुखी रहे, जो जन ध्यावै तोय।
शरण तिहारी आ गया, अब भय कछू न होय।।
परमानंद निषाद 'प्रिय'
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