क्रमाॅंक:- 717,सोनाखान, जिला-बलौदा बाजार,छत्तीसगढ़ से कवि परमानंद निषाद"प्रिय" की विशेष दोहा छंद रचना- माँ कालरात्रि स्तुति
माँ कालरात्रि स्तुति
(दोहा छंद)
कालरात्रि माँ आपका, रूप परम विकराल।
भक्तन के संकट हरो, काटो सब जंजाल।।
गदहा वाहन आपका, चमके खड्ग विशाल।
सप्तम दुर्गा रूप का, अद्भुत रूप कराल।।
नील वर्ण छवि आपकी, बिखरे पावन केश।
दूर करो अज्ञान को, हरना कष्ट कलेश।।
दुष्ट दलन माता तुही, शक्ति रूप विख्यात।
कृपा तुम्हारी जो मिले, सुख पावे दिन-रात।।
काल रूप भय हरण माँ, कल्याणी सुख-धाम।
भक्ति भाव से कर रहे, हम तुमको प्रणाम।।
अंधकार भव का मिटे, चमके दिव्य प्रकाश।
कृपा तुम्हारी जब मिले, होवे दुख का नाश।।
अभय वरद कर आपका, काटे यम का पाश।
हृदय कमल में माँ करो, सदा प्रेम से वास।।
सप्तम पावन रूप का, महिमा अमित अपार।
शरण तुम्हारी जो रहे, महके उसका द्वार।।
रिद्धि सिद्धि दात्री तुम्ही, मंगल करन कृपाल।
संकट सारे टल गए, देख तुम्हारा भाल।।
जय मात कालरात्रि माँ, विघ्न विनाशन हार।
भवसागर से पार कर, कर दो बेड़ा पार।।
परमानंद निषाद 'प्रिय'
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