क्रमाॅंक:- 718,सोनाखान, जिला-बलौदा बाजार,छत्तीसगढ़ से कवि परमानंद निषाद"प्रिय" की विशेष दोहा छंद रचना- माँ महागौरी महिमा
माँ महागौरी महिमा
(दोहा छंद)
श्वेत वसन तन पर सजे, सिंहवाहिनी मात।
गौरी माँ करुणा करे, हरे सकल उत्पात।।
वृषभ पीठ सोहे सदा, निर्मल पावन रूप।
भक्त जनों के भाग्य को, चमकाए यह धूप।।
एक हाथ त्रिशूल धरे, दूजा देवे ज्ञान।
अभय मुद्रा सुख देत है, हर लेवे अभिमान।।
अष्टमी तिथि पावन अति, आठों रूप अनूप।
महिमा गावे विश्व यह, अनुपम सुंदर रूप।।
जो ध्यावे मन शुद्ध कर, माँ गौरी का नाम।
मिटे पाप सब जन्म के, सिद्ध होयँ सब काम।।
शशि शीतल है भाल पर, मंद-मंद मुस्कान।
दुख दरिद्र सब दूर हो, मिले भक्ति का दान।।
गौर वर्ण आभा लिए, चमके दसों दिशान।
दूर करे अज्ञान को, काटे संकट-भान।।
श्रद्धा से जो शीश को, झुका चरण के पास।
माँ गौरी पूरी करे, सेवक की सब आस।।
शिव को पाने के लिए, किया कठिन तप-ताप।
प्रगटीं माँ गौरी तभी, हरने जग के पाप।।
जय जय गौरी मातु का, राखो अपनी ओट।
चरण-शरण में दीजिए, लगे न कोई चोट।।
परमानंद निषाद 'प्रिय'
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