क्रमाॅंक:- 719,सोनाखान, जिला-बलौदा बाजार,छत्तीसगढ़ से कवि परमानंद निषाद"प्रिय" की विशेष दोहा छंद रचना- माँ सिद्धिदात्री स्तुति
माँ सिद्धिदात्री स्तुति
(दोहा छंद)
ऋद्धि-सिद्धि की स्वामिनी, नौवां रूप महान।
कमलासन माता करें, भक्तों का कल्याण।।
हाथ गदा औ' चक्र है, शंख कमल अभिराम।
सिद्धिदात्री मात को, कोटि-कोटि परनाम।।
पूर्ण करें सब साधना, हर लें सारे क्लेश।
इनकी पावन दृष्टि से, रहे न दुख का लेश।।
सिंह-वाहिनी मात का, दिव्य अलौकिक रूप।
छवि लखि मन पावन भयो, मिटे मोह का कूप।।
चार भुजाओं से सदा, देतीं अभय वरदान।
शरण गहे जो मात की, पाए पद निर्वाण।।
मस्तक सोहे मुकुट सुंदर, आभा अनुपम तेज।
भक्ति-भाव से जो जपे, सजे सुकृत की सेज।।
बुद्धि ज्ञान की दायिनी, अज्ञानता विनास।
हृदय कमल में मात का, होवे सदा निवास।।
नवमी तिथि पावन परम, पूजें सकल संसार।
सिद्धिदात्री की कृपा, कर देती भव पार।।
सुर नर मुनि सब ध्यावते, करते जय-जयकार।
मैया तव चरणों विषे, शीश झुके सौ बार।।
अष्ट सिद्धि नव निधि मिले, ध्यावे जो निष्काम।
सिद्धिदात्री के चरन, सुख के पावन धाम।।
परमानंद निषाद 'प्रिय'
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