क्रमाॅंक:- 720,सोनाखान, जिला-बलौदा बाजार,छत्तीसगढ़ से कवि परमानंद निषाद"प्रिय" की विशेष दोहा छंद रचना- नवदुर्गा स्वरूप: कन्या पूजन
नवदुर्गा स्वरूप: कन्या पूजन
(दोहा छंद)
आए माँ के रूप सब, लेकर पावन भाय।
पूजन कन्या रूप का, मन हरषित हो जाय।।
लाल चुनरिया सोहती, माथे तिलक ललाट।
बैठीं देवियाँ रूप धर, सजा अनूठा ठाट।।
नव दुर्गा के रूप में, कन्या बैठीं आज।
दूर करेंगी कष्ट सब, सिद्ध करेंगी काज।।
धोकर पावन चरण को, आसन दिया बिछाय।
श्रद्धा से सब शीश को, चरणों में झुकाय।।
भोली मूरत देखकर, मनन हुआ आनंद।
छवि पावन माँ रूप की, काट रही सब फंद।।
हलवा-पूरी औ चना, भोजन दिया परोस।
तृप्त हुईं जब देवियाँ, मिटा हृदय का सोस।।
हाथ जोड़ विनती करें, मन में रख विश्वास।
करुणा मयी माँ रूप का, घट-घट में है वास।।
शीश नवा माँ रूप को, माँगा यह आशीष।
सुख समृद्ध सब को मिले, दया करो जगदीष।।
भेंट दक्षिणा प्यार से, देकर विदा कराय।
ममता मयी माँ रूप की, महिमा कही न जाय।।
मंगल मय यह पर्व है, गूँजे जय-जयकार।
कन्या पूजन से मिले, सुख का अति विस्तार।।
परमानंद निषाद 'प्रिय'
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