क्रमाॅंक:- 263, कसडोल, जिला-बलौदा बाजार (छत्तीसगढ़) से कवि परमानंद निषाद"प्रिय" की विशेष छंद मुक्त रचना- मन का मोह त्याग

विचलित मन को चैन से; काबू जो कर पाय। छोड़ो मन के मोह को; सफल काम कर जाय‌।1। मोह,माया से भटके जो; बिगड़े सारे काम। सदा रखो मन शां...

क्रमाॅंक:- 262, कसडोल, जिला-बलौदा बाजार (छत्तीसगढ़) से कवि परमानंद निषाद"प्रिय" की विशेष छंद मुक्त रचना- अन्नदाता किसान

सुबह उठकर खेत में; काम करते किसान।  धूप चाहे बरसात हो; अन्न उगाते किसान‌।1। करना हमें सम्मान है; अन्न देत हैं आज। पुण्य कर्म सदा...

क्रमाॅंक:- 261, कसडोल, जिला-बलौदा बाजार (छत्तीसगढ़) से कवि परमानंद निषाद"प्रिय" की विशेष छंद मुक्त रचना- नववर्ष की शुभकामनाएँ

नव वर्ष के आगाज से; जगमग है संसार। मध्यरात्रि इंतजार में; बाँटें प्यार दुलार।1। प्यार करो इंसान से; भारतवासी लोग। दो हजार बाईस क...

क्रमाॅंक:- 260, कसडोल, जिला-बलौदा बाजार (छत्तीसगढ़) से कवि परमानंद निषाद"प्रिय" की विशेष छंद मुक्त रचना- अग्नि देव की वंदना

अग्नि देव की वंदना; करूँ मैं बारम्बार। रूप तेरा अनेक है; वंदन कर संसार।1। पंचतत्व शरीर बना; अग्नि नाम अनेक। मिलकर ओ पंचतत्व में;...

क्रमाॅंक:- 259, कसडोल, जिला-बलौदा बाजार (छत्तीसगढ़) से कवि परमानंद निषाद"प्रिय" की विशेष दोहा छंद रचना- उपभोक्ता अधिकार

शुद्धता की पहचान तो; करता उपभोक्ता अधिकार। राशन उचित मूल्य में; देती है सरकार।1। ग्राहक भारतवासियों; नियम सहज है जाग। जब भी सब स...

क्रमाॅंक:- 258, कसडोल, जिला-बलौदा बाजार (छत्तीसगढ़) से कवि परमानंद निषाद"प्रिय" की विशेष दोहा छंद रचना- ऑक्सीजन का स्रोत है तुलसी

तुलसी ओ प्राणवायु है; मिलके सब लगाय। पवित्र तुलसी पौध है; आओ इसे बचाय।1। तुलसी आर्शिर्वाद से; तन होत है निरोग। तुलसी पौध लगाय से...

क्रमाॅंक:- 257, कसडोल, जिला-बलौदा बाजार (छत्तीसगढ़) से कवि परमानंद निषाद"प्रिय" की विशेष रचना- पैसों के आगे सब पराया

मुश्किल समय में नहीं आता है; अपने ही अपनो के काम होगा। आगे चलकर भुगतना पड़ता है; ऊँचे से ऊँचे मोल का दाम होगा।1। मोल पैसों का नह...

क्रमाॅंक:- 256, कसडोल, जिला-बलौदा बाजार (छत्तीसगढ़) से कवि परमानंद निषाद"प्रिय" की विशेष दोहा छंद रचना- गर्व हिन्दुस्तान पे

हिंद हमारा देश है; रखते सुंदर भाव। महिमा भारत मात के; मन में नाहिं अभाव।1। गर्व हमें हिंद देश पे; भारत बड़ा महान। शहीद वीर जवान ...

क्रमाॅंक:- 255, कसडोल, जिला-बलौदा बाजार (छत्तीसगढ़) से कवि परमानंद निषाद"प्रिय" की विशेष छंद मुक्त रचना- ऊर्जा बचाओ

ऊर्जा के संरक्षण से; ऊर्जा स्त्रोत बचाय। ऊर्जा खपत होत है; बिजली सीमित जलाय।1।                ऊर्जा के नव साधनें;अपनाओ सब लोग। स...

क्रमाॅंक:- 254, कसडोल, जिला-बलौदा बाजार (छत्तीसगढ़) से कवि परमानंद निषाद"प्रिय" की विशेष रचना- केशर के फूल

केशर की हैं क्यारियाँ; खुशबू फैले मंद। सुगंध करता देश को; महके केशर कंद।1। उपवन में केशर खिला; तोड़ो नाहिं ऐ डाल। केशर के वृक्ष ...

क्रमाॅंक:- 253, कसडोल, जिला-बलौदा बाजार (छत्तीसगढ़) से कवि परमानंद निषाद"प्रिय" की विशेष रचना- कलयुग

कलयुगी संसार में बढ़ रहे हैं पाप। मोह,माया के जाल में जीवन चलो माप। खून  ही  खून  को  मार  रहे  हैं, इस दुनिया में अपनों में सब ...

क्रमाॅंक:- 252, कसडोल, जिला-बलौदा बाजार (छत्तीसगढ़) से कवि परमानंद निषाद"प्रिय" की विशेष रचना- बाबा गुरु घासीदास की पुण्य स्मरण

संत श्री गुरु घासीदास बाबा, संत संप्रदाय के सर्वोपरि माने जाते। बाल्यावस्था से ही कुप्रथा पर, सामाजिक सेवा में जीवन बीते।। संत  ...

क्रमाॅंक:- 251, कसडोल, जिला-बलौदा बाजार (छत्तीसगढ़) से कवि परमानंद निषाद"प्रिय" की विशेष रचना- मेरा पहला प्यार हो तुम

प्यार का इजहार किया पूनम की रात को। स्वीटी से बात किया प्रिय आधी रात को।। तेरे बिखरे बालों से सुगंध आने लगा। नयन तेरे कजरारे पाग...

क्रमाॅंक:- 250, कसडोल, जिला-बलौदा बाजार (छत्तीसगढ़) से कवि परमानंद निषाद"प्रिय" की विशेष छंद मुक्त रचना- मौन

मौन रहे इंसान जो; है उसका संस्कार। जब भी लगाये दम वो; मचता हाहाकार।1। शांति से लिख जाता है; कलम की वो धार। शांत से कर जाता है; स...

क्रमाॅंक:- 249, कसडोल, जिला-बलौदा बाजार (छत्तीसगढ़) से कवि परमानंद निषाद"प्रिय" की विशेष रचना- गाँव से शहर की ओर

गाँव  अब  गाँव  ना  रहा, शहर  का  रूप  ले  रहा। गाँव के  सभी  लोग अब, शहर में पलायन हो रहा।1। दिल में छोटी-सी कश्ती है, जो खोई  ...

क्रमाॅंक:- 248, कसडोल, जिला-बलौदा बाजार (छत्तीसगढ़) से कवि परमानंद निषाद"प्रिय" की विशेष रचना- आरक्षण

सुधार कर आरक्षण को बढ़ाना हमको देश। गरीब के आर्थिक स्थिति को सुधार, हमें बनाना है एक सुंदर हिंद देश। जिससे चमक उठे सारा संसार।1।...

क्रमाॅंक:- 247, कसडोल, जिला-बलौदा बाजार (छत्तीसगढ़) से कवि परमानंद निषाद"प्रिय" की विशेष छंद मुक्त रचना- सुरक्षा बल

घर द्वार को त्याग कर; सीमा पर तैनात। आतंकियों से मुक्त हो; दिखा दो औकात।1। सीमा पर तैनात है; हमारे वीर जवान।   चाहे तपती धूप हो;...