क्रमाॅंक:- 553, सोनाखान, जिला-बलौदा बाजार,छत्तीसगढ़ से कवि परमानंद निषाद"प्रिय" की विशेष छंद मुक्त रचना- ये दिल तेरा दीवाना
बाल फैलाकर सुंदरी शरमा रही हो। होले होले होंठों से मुस्कुरा रही हो।। कान में बाली लगाकर क्यों..? हिरनी जैसी कमर मटका रही हो।। सु...