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क्रमाॅंक:- 153, कसडोल, जिला-बलौदा बाजार (छत्तीसगढ़) से कवि परमानंद निषाद"प्रिय" की विशेष रचना- नजराना

                           नजराना       ना नजर था ना नजराना था, आपका आना था और हमारा जाना था, क्या करे इसे किस्मत का खेल कहे, और...

क्रमाॅंक:- 152, कसडोल, जिला-बलौदा बाजार (छत्तीसगढ़) से कवि परमानंद निषाद"प्रिय" की विशेष रचना- पेड़ लगाओ, पर्यावरण बचाओ

           पेड़ लगाओ, पर्यावरण बचाओ सुनो भारत देश के वासियों, जंगल का नाश करना बंद करो। धरा  को  हरा  भरा  बनाकर, पेड़-पौधों का ...

क्रमाॅंक:- 151, कसडोल, जिला-बलौदा बाजार (छत्तीसगढ़) से कवि परमानंद निषाद"प्रिय" की विशेष रचना- दिल चुराए बैठी हो

                   दिल चुराए बैठी हो नजर और सिर झुकाए बैठी हो। अपनी जुल्फों को फैलाए बैठी हो। जब से मैने तुमको देखा हूॅं, मेरा द...

क्रमाॅंक:- 150, कसडोल, जिला-बलौदा बाजार (छत्तीसगढ़) से कवि परमानंद निषाद"प्रिय" की विशेष रचना- संघर्ष ही जीवन है

                  संघर्ष ही जीवन है छोटी-छोटी खुशियाॅं बड़ी बन जाती हैं। छोटी खुशियाॅं जीने का सहारा बन जाती हैं। जिस प्रकार बूॅ...

क्रमाॅंक:- 149, कसडोल, जिला-बलौदा बाजार (छत्तीसगढ़) से कवि परमानंद निषाद"प्रिय" की विशेष रचना- फलों के राजा आम

                 फलों के राजा आम पके हुए हैं आम ,बता दो उनके दाम। छोटे,बड़े रसदार पके हुए हैं आम। रसदार  और  मीठे  होते हैं, फलो...

क्रमाॅंक:- 148, कसडोल, जिला-बलौदा बाजार (छत्तीसगढ़) से कवि परमानंद निषाद"प्रिय" की विशेष रचना- नारी बिना सब सून

                  नारी बिना सब सून पुरूषों के  जीवन में  नारी, खुशबू फैलाती है सारी।१। बनकर नारी पुरूषों की ढाल, खुशियाॅं फैलाती...

क्रमाॅंक:- 147, कसडोल, जिला-बलौदा बाजार (छत्तीसगढ़) से कवि परमानंद निषाद"प्रिय" की विशेष छत्तीसगढ़ी गीत- आबे रानी मोर गाॅंव

                आबे रानी मोर गाॅंव जंगल झाड़ी के रहइया ओ रानी। सुघ्घर  निठोरा मोर  गाॅंव ओ। घूमे ल आबे मोर गाॅंव मा रानी घुमाहूँ...