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क्रमाॅंक:- 143, कसडोल, जिला-बलौदा बाजार (छत्तीसगढ़) से कवि परमानंद निषाद"प्रिय" की विशेष रचना- हसदेव के गोहार

                    हसदेव के गोहार हसदेव  अरण्य  काट  रहे, इंसान संकट को बुला रहे। मानवता अब खत्म हो रहा, प्रकृति से खिलवाड़ कर ...

क्रमाॅंक:- 142, कसडोल, जिला-बलौदा बाजार (छत्तीसगढ़) से कवि परमानंद निषाद"प्रिय" की विशेष रचना- अपनों का प्यार मिले

                 अपनों का प्यार मिले जिंदगी जी लो अपने परिवार के संग। अपनों के जिंदगी में भर लो प्यार के रंग।। पता नहीं जिंदगी क...

क्रमाॅंक:- 141, कसडोल, जिला-बलौदा बाजार (छत्तीसगढ़) से कवि परमानंद निषाद"प्रिय" की विशेष रचना- मैं खुद से अनजान हूॅं

                मैं खुद से अनजान हूॅं इस छोटी सी दुनिया में, मैं  एक  अनजान  हूॅं। कौन क्या?कुछ पता नहीं, मैं  खुद  से  अनजान  ह...

क्रमाॅंक:- 140, कसडोल, जिला-बलौदा बाजार (छत्तीसगढ़) से कवि परमानंद निषाद"प्रिय" की विशेष छत्तीसगढ़ी गीत- गोरी तोर मीठ बोली

                    गोरी तोर मीठ बोली   लय  ओ,हो,हो,हो,ला,ला,ला,ला ला,ला,ला,ला,ला,ला, ला तर्ज गोरी तोर मीठ बोली बड़ नीक लागे ओ। ...

क्रमाॅंक:- 139, कसडोल, जिला-बलौदा बाजार (छत्तीसगढ़) से कवि परमानंद निषाद"प्रिय" की विशेष रचना- हसदेव अरण्य

                       हसदेव अरण्य आओ मिलकर हसदेव अरण्य को बचाएं। जन-जन में जागरूकता फैलाएं। अंधाधुंध पेड़-पौधे काटे जा रहे, पर्...

क्रमाॅंक:- 138, कसडोल, जिला-बलौदा बाजार (छत्तीसगढ़) से कवि परमानंद निषाद"प्रिय" की विशेष रचना- चढ़ता घमंड

                    चढ़ता घमंड चढ़ता   घमंड  में   इंसान, रिश्तें-नाते  भूल  जाते  हैं। पैसों  का  रौब  दिखाकर, चढ़ता घमंड दिखा ...

क्रमाॅंक:- 137, कसडोल, जिला-बलौदा बाजार (छत्तीसगढ़) से कवि परमानंद निषाद"प्रिय" की विशेष रचना- इश्क में जुदाई की तड़प

              इश्क में जुदाई की तड़प मैं तेरे प्यार में जलता ही रहा, दिन-रात जल बीन मछली तड़पता ही रहा। नहीं भुल पाया  यादों को ...